नाम : ए. ए. कृष्णस्वामी अय़यंगार
जन्म : 01 दिसंबर 1982
ठिकाण : अटिटपटटू चिंगलपुट तामिळनाडू
पत्नी : शेषमल
व्यावसाय : गणितज्ञ
प्रारंभिक जीवन :
ए. ए. कृष्णस्वामी अयंगार इनका जन्म 01 दिसंबर 1982 मे तामिळनाडू मे हुआ था | उन्होंने 18 वर्षे की आयु मे गणित मे एम ए किया और बाद मे अपने स्वयं के अल्मा मेंटर मे गणित पढाना शुरु किया | उनका विवाह शेषमल से हुआ था | और उनके चार बेटै थे, एके श्रीनिवासन एके रामानुजन एके राजगोपाल एके वासुदेवन और दो बेटियॉ श्रीमती वेदवती भोगीशायण और श्रीमती सरोज कुष्णमूर्ति 1918 मे वे गणि विभाग मे शामिल हो गए |
विश्वाविघ्यालय मे अपने कार्यकाल के दौरान, लगभग तीन दशको तक उन्होने यामिती, सांख्यिकी खागोल विज्ञान, भारतीय गणित का इतिहास और अन्या विषयों मे कई योगदान दिए | टाटा इंस्टीटयूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के प्रोफेसर आर श्रीधरन के साथ अकिस्मक बातचीत पर एएके के काम की मौलिकता को राजगोपाल के घर लाया गया, बंबई 1998 मे प्रोफेसर श्रीधरनन ने उन्हे एक लेखा दिया जो उन्होंने विज्ञान मे पश्चिम और भारत मे लिखा |
बी. बी. सुब्बारप्पा और एन मुकूंद व्दारा संपादित 1995 हिमालय पब्लिशिंग हाऊस बॉम्बे उन्होंने हिंदू गणित के इतिहास पर महत्वापूर्ण काम किया | जो भी अन्या प्रभाव है यह निश्चित रुप मे भारत की समृध्दा गणितीय विरासत और गणित के अध्यायन मे रुचि के नवीरकण के लिए एक बढती जागरुकता और प्रशंसा की और ले गए | तामिलनाडू मे इस पुनर्जागरण ने खूद को बहूत सारे प्रतिभाशाली शिक्षकों के आने मे दिखाया, न केवल गणित मे बल्की देश की गणितीय विरासत मे भी पारंगत | ए.ए.कृष्णस्वामी आयंगार उनके प्रमूख थे |
कार्य :
अयंगार नवंबर 1923 मे एडिनबर्ग मैथमैटिकल सोसाइटी मे शामिल हुए | उन्होंने शुक्रवार 7 नवंबर 1924 को सोसाइटी की एक बैठक मे द सेक्सि सेक्शनल समीकरण पर पेपर पढा | वह लगभग 10 वर्षेा तक सोसाइटी के सदस्या रहे 1991 मे गणित मे एम ए किया जब वह 18 वर्षे के थे फिर उन्हे पचियाप्पस कॉलेजे मे गणित पढाने के लिए नियुक्त किया गया और उन्हेांने 1918 तक वहाँ पढाया |
तामिलनाडू मे इस पुनर्जारण ने खू को बहूत सारे प्रतिभाशाली शिक्षको के आने मे दिखया न केवल गणित मे बल्कि देश की गणितीय विरासत मे भी पारंगत ए ए कृष्णस्वामी आयंगार उनमे प्रमूख थे | 1918 मे कृष्णस्वामी आयंगार ने चेन्नाई छोड दिया और मैसूर शैक्षिक सेवा मे शामिल हो गए और महाराजों कॉलेज के गणित विभाग मे काम किया | उन्होने कुछ समय के लिए सांख्यिकी विभाग, आंध्र विश्वाविघालय के वाल्टेयर मे रिडर के रुप मे भी काम किया |
उपलब्धियॉ :
1) प्राचीन हिंदू गणित् 1921|
2) दिहिदू साइन टेबल 1923:24|
3) आर्यभटट का गणित 1926|
4) हिदू आरबी अंब भाग 2 1928/29|
5) भास्कार और समसलीता कुटटूका 1929:30|
6) भास्कार के चक्रवाला या दो चर 1929:30|
7) पुराने प्रमेयों के नए प्रमाण अपोलोनियस और ब्रम्हगुप्त 1920:30|
8) खगोल विज्ञान अतीत और वर्तमान 1930|
9) प्राचीन हिंदू गणित की कुछ झालाकियॉ 1933|
10) चौद कैलेंडर 1937|