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असीस दत्ता की जीवनी - Biography of Asis Datta in hindi jivani

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नाम : असीस दत्ता

जन्म दि : 2 फरवरी 1944

ठिकाण : पश्चिम बंगाल, भारत

व्यवसाय : आणविक जीवविज्ञानी

पत्नी : कस्तुरी दत्त्


प्रारंभिक जीवनी :


        दत्ता का जन्म 2 फरवरी 1944 को हुआ था | ने बोस इंस्टीटयूट मे अपने डॉक्टरेट के काम के लिए कलकत्ता विश्वविघालय से पिएचडी की उपाधि प्राप्त् की थी | बाद मे उन्होंने कलकत्ता विश्वविघालय से डॉक्टर ऑफ साइंस डीएससी की उपाधि प्राप्त् की | बोस इंस्टीटयूट मे डॉक्टरेट का काम 1964 से 1996 तक भारत सरकार से एक फैलो शिप व्दारा किया गया था | इसके बाद वे 1991 तक शोध जारी रखने के लिए पब्लिक हेल्थरिसर्च इंस्टीटयूट मे रिसर्च एसोसिएट के रुप मे न्यूयॉर्क चले गए | उनका अगला कदम कैलिफोर्निया विश्वविघालय, लॉस एंजिल्स मे सहायक विरोलॉजिस्टके रुप मे था | जहाँ उन्होने तीन साल बिताए | 1995 मे भारत लौटकर, उन्होने जवाहरलाल नेहरु विश्वविघालय (JNU) मे अपने स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज मे दाखिला लिया | और 1990 मे एक प्रोफेसर के पद तक पहूंचे | उन्होने JNU मे कई पदों पर काम किया जैसे कि 1983 से 1985 तक डीन थी |


कार्य :


        असीस दत्ता एक भारतीय बायोकेमिस्ट, अणविक जीवविज्ञानी और जेनेटीक इंजीनियर है | जो अनुवंशिक रुप से संशोधित खाध पदार्थो और खाध पोष्ण सुरक्षा पर अपने शोध के लिए जाने जात है | वह नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ प्लांट जीनोम रिसर्च के संस्थापक निदेशक थे | और उन्हे ऐसे जीन की खोज का श्रेय दिया जाता है | जो फलों और सब्जियों के विस्तारित संरक्षण बने और 2002 तक इस पद को धारणा किया था | इस अवधि के दौरान उन्होंने अपने शैक्षणिक वर्षो के लिए शेश इंस्टीटयूट ऑफ मॉलिक्यूलर बायोलॉजी मे वैज्ञानिक के रुप मे भी काम किया |


        1976-77 और 1980-81 मे, जब नेशनल सेंटर फॉर प्लॉट जीनोम रिसर्च दत्ता को इसके संस्थापक निदेशक के रुप मे अपग्रेड किया गया | उन्होंने 2000 मे अपनी सेवानिवृत्ति तक संस्थान मे काम किया | अपने अधिकारिक करियर के अंत मे, उन्हे जवाहरलाल नेहरु विश्वविघालय व्दारा एमिरिटस प्रोफेसर के रुप मे और प्रतिष्ठित एमेरिटसिस्ट और प्रोफेसर एमेरिटस के रुप मे प्रतिष्ठित किया गया था | नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ प्लांट जीनोम रिसर्च किया था |



        एक शिक्षक के रुप मे अपने अकादमिक योगदान के अलावा, दत्ता ने जवाहरलाल नेहरु विश्वविघालय के विकास और विश्वविघालय के भीतर उत्कृष्टता के केंद्रो की स्थापना करके योगदान दिया है | उन्हें आणविक जीव विज्ञान के क्षेत्र मे अग्रणी शोध का श्रेय भी दिया जाता है कैंडिडा अल्बिकंस पर उनके शोध, कवक की एक रोगजनक विविधता जो कैंडिडि आसिस का कारण बनती है |

मनुष्यों के लिए एक संक्रमण है | ने बिमारी का मुकाबला करने के लिए एक दवा डिजाइन करने में सहायता की है | उनकी अगुवाई वाली टीम ने जैविक अनुसंधान किए है |


        जिसमें कृषि, चिकित्सा, विज्ञान और उघोंग के क्षेत्र मे अनुप्रयोग है : जीन की खोज जो फलों और सब्जिओं के शेल्फजीवन को विस्तारीत करने मे मदद करती है और आनुवांशिक रुप से संशोधित भोजन के विकास दो ऐसे अनुप्रयोग है | उनकी टीम अमेरिकी पेटैंट प्राप्त् करने मे सफल रही जो पहली बार एक भारतीय फर्म ने जीन के लिए अमेरिकी प्राप्त् किया | यूकेरियोटिक जीन के संरचना कार्य अनुप्रयोग पर उनके शोध ने राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान, जेनेटिक अनुसंधार के लिए भारत मे पहला संस्थान बनाने का मार्ग प्रशस्त् किया है |


        उन्होंने कई लेख प्रकाशित किए है | अपने शोधो का दस्तावेजीकरण करते हुए, सहकर्मी की समीक्षा की गई पत्रिकाओं में और google विव्दान ने उनमें से 226 को सूचीबध्द किया है | जिसमे 20 का एच-इंडेक्स और 35 का आई 10 इंडेक्स् 2010 से है | उन्होंने अपने शोध् निष्कर्षो के लिए भारतीय पेटेंट अमेरिकी पेटेंट और अन्य देशो के 3 पेटैंट रखे | उन्होंने अपने डॉक्टरल शोध मे 45 से अधिक अनुसंधान विव्दानों का भी उल्लेख किया है |


पूरस्कार और सम्मान :


1) दत्ता तीनों प्रमूख भारतीय विज्ञान अकादमियों, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी 1988.

2) नेशनल एकेडमी ऑफ साइंजेस, भारत 1991

3) इंडियन एकेडमी ऑफ साइंजेस 1992

4) द वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंस के एक निर्वाचित फेलो है |

5) TWAS ने 1998 मे उन्हे अपना फेलो भी चुना |

6) बर्दमान विश्वविघालय ने उन्हे 2002 मे डॉक्टर ऑफ साइंस मानद कारण की उपाधि प्रदान की |

7) बिधान चंद्र कृषि विश्वविघालय , विघासागर विश्वविघालय और पंडित रविशंकर शुक्ल् विश्वविघालय ने भी सम्मानित किया |

8) दत्ता को 1980 मे वैज्ञानिक और औघेगिक अनुसंधान परिषद व्दारा सर्वोच्च् भारतीय विज्ञान पुरस्कार शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार से सम्मनित किया गया था |

9) 1980 के दशक के अंत में और 90 के दशक की शुरुआत मे, उन्होने तीन प्राप्त् किए- गुहा मेमोरियल अवार्ड 1988 विज्ञान और प्रोघोगिकी के लिए उदघाटन जीडीबिडला पुरस्कार 1991

10) भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी 1993 के डॉक्टर नित्या आनंद एंडामेंट अवार्ड से सम्मनित 

11) फिक्की अवार्ड

12) रैनबैक्सी पूरस्कार 

13) डी एम बोस स्वर्ण पदक

14) इंदिरा प्रियदर्शनी पूरस्कार

15) आरडी बिडला पूरस्कार

16) डॉ.बी.आर आंबेडकर शताब्दी पुरस्कार

17) एस बी सी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड

18) पी सी महालनोबिस मेमोरियल अवार्ड

19) अशुतोष मुखर्जी मेउल

20) ISC लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

21) बी आर एस लाइप्फटाइम अचीवमेंट अवार्ड

22) प्रियदर्शनी गोल्ड मेंडल

23) जी एम मोदी विज्ञान पूरस्कार

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