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एननेकल चांडी जॉर्ज सुदर्शन की जीवनी - Biography of Ennekal Chandy George Sudarshan in hindi jivani

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नाम: एननेकल चांडी जॉर्ज सुदर्शन

जन्म तिथी : 16 सितंबर 1931

ठिकाण : केरल, पल्लाम

व्यावसाय : भौतिक विज्ञानी

मृत्यू : 13 जुलाई 2018 आयू 86 वर्षे


प्रारंभिक जीवनी :


        जॉर्ज सुदर्शन का जन्म 16 सितंबर 1931 को केरल के त्रावणकोर के पल्लाम मे हआ था | एक सिरियाई ईसाई परिवार मे पाले जाने के बावजूद, उन्हेांने बाद मे धर्म छोड दिया था | उन्होने सीएमएस कॉलेज कोट्रटायम मे अध्यायन किया और 1951 मे मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से सम्मान के साथ स्त्रातक कि उपाधि प्राप्ता कि थी |


        उन्होंने 1952 मे मद्रास विश्वाविघ्यालय मे अपनी मास्टार डिग्री प्रापता कि थी | वह रॉबर्ट मार्शाके स्त्रातक छा9 के रुप मे काम करने के लिए न्यूयॉर्क के रोचेस्टार विश्वाविघ्यालय चले गए थे | 1958 मे उन्हेांने अपनी पीएचडी रोचेस्टार विशवविघ्यालय से डिग्री हासिल कि | इस बिंदू पर वह हार्वर्ड विश्वाविघ्यालय मे पोस्टाडॉक्टोरल साथी के रुप मे जूलियन श्विगर से जुने के लिए चले गए थे |


        उन्हेाने भामत सुदर्शन से शादी कि थी | और उनके तीन बेटे सिकंदर, अरविंद मृतक आशोक है | उन्हेांने खूद को वेदांतिन हिंदू माना था | उन्होंने भगवान के बारे मे चर्च के दृष्टीकोण और माघ्यामिक अनुभव कि कमी के कारण असहमति का उल्लेख किया है | क्योंकि उन्हेांने ईसाई धर्म् छोड दिया था |


कार्य :


        वह एक भारतीय सैघ्दांतिक भौतिक विज्ञनी और टैक्सास विश्वविघ्यालय मे प्रोफेसर थै | सुदर्शन को ऑप्टिकल भौतिकी, वी ए सिध्दांत टैकियांना व्कांटम जेनो प्रभाव ओपन व्कांटम सिस्टाम और लिंडब्ड समीकरण स्पिन सांख्यिकि प्रमेय और कई योगदानों का श्रेय दिया गया है |


        उनके योगदान मे पूर्व और पश्चिम के बीच के संबंध दर्श्ंन और धम्र भी शामिल है | वे टाटा इंस्टीटयूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च टीआयएफआर चले गए और वहाँ के लिए काम किया था | उन्हेांने सुसंगत प्रकाश का एक व्कांटम प्रतिनिधत्वा के रुप मे जाना जाता है |


        सुदर्शन का सबसे महत्वापूर्ण काम व्कांटम ऑप्टिक्सा के क्षेत्र मे उनका योगदान हो सकता है | उनका प्रमेय शास्त्रीय तरंग प्रकाशिकी के व्कांटम प्रकाशिकि के समकक्ष साबित होता है | 1969 ये चह ऑस्टिन मे टेक्सास विश्वाविघ्यालय मे भौतिक कि प्रोफेसर और भारतीय विज्ञान संस्थान मे एक वरिष्ठा प्रोफेसर थे |


        उन्हेांने 1980 के दशक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच अपने समय को विभाजित करने के लिए पांच साल के लिए इंस्टीटयूट ऑफ मैथमेटिकल साइंसेज आयएमएससी चेनन भारत के निदेशक के रुप मे काम किया था | वेदांत मे भी उनकी गहरी रुचिथी | जिस पर वह अक्सार व्याख्यान देते थै |


        सूदर्शन ने 1960 मे रोचेस्टार विश्वाविघ्यालय मे व्कांटम ऑप्टिक्सा पर काम करना शुरु किया | दो साल बाद, ग्लुबेर ने ऑप्टिकल क्षैत्रों कि व्याख्या करने मे शास्त्रीय विदयूत चुम्बंकीय सिध्दांत के उपयोग कि आलोचना कि थी | जिसनेसुदर्शन को आश्चर्यचकित कर दिया क्योंकि उनका मानना था | कि सिध्दांत सटीक स्पटीकरण प्रदान करता है |


पूरस्कार और सम्मान :


1) 2013 जीवन भर कि उपलब्धियों के लिए केरल शास्त्रा पुरस्कार से सम्मानित|

2) आयसीटीपी 2010 का डिरेंक मेडल से सम्मनित|

3) 2007 मे भारत सरकार का दूसरा सर्वोच्चा नागरिक सम्मान पुरस्कार पदमविभूषण से सम्मानिनत|

4) 2006 मे मेजराना पूरस्कार|

5) 1985 मे भौतिकी मे प्रथम पूरस्कार|

6) 1985 मे भौतिकी मे प्रथम पूरस्कार |

7) 1977 मे बोस मेडल से सम्मनित|

8) पदमभूषण भारत सरकार का तीसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार 1976 से सम्मानित|

9) सी वी रमन पूरस्कार 1970 से सम्मानित|

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