Type Here to Get Search Results !

इंदिरा नाथ की जीवनी - Biography of Indira Nath in hindi jivani

0


नाम : इंदिरा नाथ

जन्म तिथी : 14 जनवरी 1938 आयू 82

ठिकाण : आंध्रप्रदेश

 व्यावसाय : प्रतिरक्षा विज्ञानी


प्रारंभिक जीवनी :


        इंदिरा नाथ का जन्म 14 जनवरी 1938 को आंध्रप्रदेश मे हुआ था | नाथ ने अखिल भारतीय आयूविज्ञान संस्थान एआयआय एमएस नई दिल्ली से एमबीबीएस प्राप्ता कियाथा | वह यूके मे अनिवार्य अस्पताल प्रशिक्षण के बाद एम्सा मे एमडी पेथोलॉजी के रुप मे शामिल हुई थी | उन्हेांने 2002 मे पियरें और मैरी क्यूरी विश्वाविघ्यालय पेरीस से डीएससी प्राप्ता कि थी |


कार्य :


        इंदिरा नाथ एक भारतीय प्रतिरक्षा विज्ञानी है | चिकित्सा विज्ञान मे उनसका प्रमूख योगदान मनूष्या मे प्रतिरक्षा मे अंतर्निहित तंत्र के लिए मार्करो की खोज से संबंधित है | इंदिरा नाथ के विशेषज्ञता के क्षेत्र इम्यूनोलॉजी, पैथोलॉजी, मेडिकल बायोटैक्नोलॉजी और संचारी रोग है | 1970 के दशक के दौरान भारत मे 4.5 मीलियन कि दुनिया है | कुष्ठ रोगियों कि सबसे बडी संख्या है | इस अवधि के दौरान वह प्रतिरक्षा विज्ञान के विशेषज्ञ के रुप मे आई थी |


        उन्हेांने संक्रामक रोगो के क्षेत्र मे काम किया था | विशेष रुप से कुष्ठरोग रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन मे प्रोफेसर जॉन तुर्क और नेशनल इंस्टीटयूट फॉर मेडिकल रिसर्च लेदन मे कार्य किया था | उसने विदेश मे अनूभव प्रापता करने के महत्वा को देखा लेकिन भारत से बाहर मस्तिष्क नाली मे जोडना नही चालता था | उसने और उसके पति ने 3 साल बाद विदेश लौटने के लिए एक समझौता किया था | वह 1970 के दशक कि शूरुआत मे भातर लौटी थी |


        2002 मे नेचर मेडिसिन पर प्रकाशित एक सक्षात्कार मे उन्हेांने कहा फिर भी वापस आने के लिए वह काफी रोमांचक समयथा | क्योंकि अपको लगा कि आप वास्ताव मे अनूसंधान के निर्माण मे भूमिका निभा सकते है | भारत वापस आने के बाद वह एम्स मे प्रोफेसर गूरसरन तलवार के बायोकेमिस्ट्री विभाग मे शामिल होगई थी | जिसने भारत मे अभी इम्यूनोलॉजी रिसर्च शूरु किया था | उन्हेांने एम्सा मे डिपार्टमेंट बायोटेक्नोलॉजी 1986 कि स्थापना कि थी | वह 1998 मे सेवानिवृत्ता हुई लेकिन एम्सा एसएन बोस रिसर्च प्रोफेसर के रुप मे एम्सा मे काम करती रही |


        वह राजीव गांधी व्दारा एकत्र किए गए 100 वैज्ञानिकों मे से एक थे | जब वह भारतीय विज्ञान मे सूधार के लिए सूझााव देने के प्रधानमंत्री बनी थी | उन्हेांने 2002 मे पियरें और मेरी क्यूरी विशविघ्यालय परिस से डीएससी प्राप्ता कि थी | उन्हे मलेशिया मे एआईएमएसटी विश्वाविघ्यालय के डीन औरब्लू पीटर रिसर्च सेंटर के निदेशक के रुप मे भी सामंत्रित किया गया था |


पूरस्कार और सम्मान :


1) 2003 मे सिल्वर बैनर से सम्मानित किया गयाथा |

2) 2003 मे शेवेनियर ऑर्ड्रै नेशनल टू मेरिट से सम्मानित किया गया था |

3) 2002 मे विमेन इन साइंस एशिया पैसिफिक पूरस्कार से सम्मानित किया गया था | 

4) 1999 मे पदमश्री से सम्मानित किया गया था 

5) 1995 मे आरडी बिडला पूरस्कार से सम्मानित किया गया था 

6) 1995 मे कोचरन रिसर्च अवार्ड से सम्मानित किया गया था |

7) 1990 मे ओमप्रकाश भसीन पूरस्कार से सम्मानित किया गया था 

8) 1983 मे शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार से सम्मानित किया गया था 

9) वे नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, भारत इलाहाबाद 1988 इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज बैंगलोर 1990 मे फेलो चुनी गई थी |

10) वह मंत्रिमंडल कि सदस्या वैज्ञानिक सलाहकार समिती विदेश सचिव आयएनएसए परिषद कि सदस्या के रुप मे फेलो थी |

Post a Comment

0 Comments