नाम : रविंद्र श्रीपाद कुलकर्णी
जन्म : 1942
ठिकाण : महाराष्ट्र, भारत
व्यावसाया : गणितज्ञ, प्रोफेसर
प्रारंभिक जीवनी :
रविंद्र श्रीपाद कुलकर्णी एक भारतीय गणितज्ञ है | जो कि अंतर जयामिती मे विशेषज्ञता रखते है रिंवद्र श्रीपाद कुलकर्णी का जन्म सन 1942 को भारत मे महाराष्ट्र राजया मे हुआ है |
उन्हेांने सन 1968 मे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से थीसिस कर्वचर और मैट्रिक के साथ अपनी पीएचडी कि उपाधि प्राप्ता कि है | पीएचडी के लिए उन्हें श्लोमो स्टर्नबर्ग का मार्गदर्शन मिला है | वह सन 1980 से 1981 तक गुगेनहाइम के फेलो रहे है |
कार्य :
रविद्र ने अपने करियर मे लगभग 40 से अधिक वर्षो के लिए अमेरिका मे जॉन्सा हॉपकिंन्सा विश्वाविघ्यालय कोलंबिया विश्वाविघ्यालय इंडियाना विशवाविघ्यालय ऑर न्यूयॉर्क के सिटी विश्वाविघ्यालय मे शोध कार्य किया है| उसके बाद वह भारत लौट आऐ थे | फीर वह भारत के हरीशचंद्र अनूसंधान संस्थान मे प्रोफेसर के रुप मे मे और फिर बाद मे निदेशक के रुप मे तीन साल तक कार्यरित रहे है |
उसके बाद उन्हेांने भारत मे गणित और सैघ्दांतिक भौतिकी के लिए संस्थान, भारतीय प्रौघोगिकी संस्थान मे गणित् के लिए संस्थान भारतीय प्रौघोगिकी संस्थान मे गणित के अध्याक्ष के रुप मे 7 साल त कार्यभारत संभाला है |
वह गणित और विज्ञान के दर्शन मे रुचि रखते है | उनके पास रामानुजन का दिमाग कैसे काम करता है | कि कल्पाना अभी तक नही है | रविंद्र ने रामनानूजन का कैसे काम करताहै , कि कल्पना अभी तक नही है | रविंद्र ने रामानुजन गणितीय सोसायटी के अध्याक्ष के रुप मे कार्य किया है |
उपलब्धि :
1) रविंद्र को यूएस और कनाडा से गुग्गेन्हीम फेलोशिप नॅचरल साइंस के लिए मिली है |
पूस्तक :
1) 1969 वक्रता संरचनाएं और अनूरुप परिवर्तन|
2) 1972 अनूरुप रुप से फलैट मैनिफोल्डस|
3) 1975 असली मैनिफेस्टास के जटिल होने पर |
4) 1975 उच्चा आयामे मे अनूरुप जयामिती|
5) 1980 हवटिटज पर 84 जी1 प्रमेय और स्यूडोफ्री किया ए|
6) 1986: समूहों और सतहों के टसिलेशन्सा के मरोड मुक्त उपसमूह|
7) 1990 वर्दी पेड कि जाली पर |
8) 2009: हाइपरबेलिक स्पेस के आइसेमिट्रीज के 2 क्लासेस|