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संपत कुमार टंडन की जीवनी - Biography of Sampat Kumar Tandon in hindi jivani

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नाम : संपत कुमार टंडन

जन्म तिथि : 13 अगस्त 1945

ठिकाण : दिल्ली, भारत

पत्नि : अनीता मेहरोत्रा

व्यावसाय : भू विज्ञानी, प्रोफेसर


प्रारंभिक जिवनी :


        संपत कुमार टंडन एक भारतीय भूविज्ञानी और दिल्ली विश्वाविध्यालय मे भूविज्ञान के एक प्राध्यापक है | वह दिल्ली विश्वाविघ्यालय के पूर्व प्रो वाइस चांसलर पृथ्वी और पर्यावरण विज्ञान विभाग के भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनूसंधान संस्थान भोपाल मे एक सर जेसी बोस चेयर प्रोफेसर भी है | वह डीएन वाडिया चेयर प्रेाफेसर है |


        संपत कुमार टंडन का जमन 13 अगस्ता 1945 मे भारत दिल्ली शहर मे हुआ है | उन्होंने सीनियर कैम्ब्रिज कि सन 1961 मे पढाई कि है | एसे बाद सन 1961 से 1965 के दौरान पंजाब विश्वाविघ्यालय से एमएससी ऑनर्स कि उपाधि प्राप्ता कि है | उन्हेांने दिल्ली विश्वाविघ्यालय से पीएचडी कि उपाधि प्राप्ता कि है | 1984 से 1985 मे उन्हेांने शिजूका विश्वाविघ्यालय के भूविज्ञान संस्थान मे डॉक्टरेट कि पढाई कि उन्हें दो बेटे आदित्या और अमिताभ है | उनका परिवार दिल्ली मे रहता है |


कार्य :


        सन 1966 मे उन्हेांने भारतीय प्रौघोगिकी संस्थान, दिल्ली मे एन व्याख्याता के रुप मे काम किया है | फीर दो साल के लिए उन्होंने वाडिया इंस्टीटयूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक अधिकारी के रुप मे काम किया है | सन 1976 मे वसंकाय के सदस्या रुप मे दिल्ली विश्वाविघ्यालय मे शामिल हुए थे | फिर उन्हेांने वहां पर सन 1990 से 1993 तक विज्ञान संकाय के डीन और 2005 से 2006 तक प्रो वाइस चांसलर के रुप मे रुप कीया है | वह सन 2010 तक अनूसंधान और अंतरराष्ट्रीय संबंधो के डीन पद पर रही है |


        संपत ने 1982 मे गुल्फ विश्वाविघ्यालय मे एक विजिटिंग प्रोफेसर के रुप मे कार्य किया है | 1984से के दौरान कैम्ब्रिज विश्वाविघ्यालय मेरॉयल सोसायटी के साथी के रुप मे कार्य किया है उन्हेांने शिजूका विश्वाविघ्यालय फेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च, ईस्ट इंडिया एंग्लिया विश्वाविघ्यालय मे एक विजिटिंग प्रोफेसर के रुप मे कार्य किया है |


        सन 2006 मे फ्रांस और दिल्ली विश्वाविघ्यालय काबूल मे वह उपकूलपति के प्रतिनिधीमंडल के सदस्या रहे है | वह विज्ञान और प्रौघोगिकी विभाग व्दारा प्रायोजीत इंडोहंगेरियन रिसर्च प्रोजेक्ट से जुडे थे | उन्हेांने सन 2006 मे 2007 मे भूवैज्ञाानिक संस्थान, बुडोपस्टा का दौरा किया है |


        संपत ने टेक्टोनिक्सा और मैग्नेटोस्ट्रेटीग्रफी पर व्यापक रुप से शोध कार्य किया है | सिवालिक चटानों पर उनके काम से हिमालय के इस विवर्तनिक रुप से गतिशिल क्षेत्र कि व्यापक समझा मे सहायता मिली है | उन्हेांने भारत मे जिगोलो के चुंबकिय घ्रूवता ल्यूमिनेसेंस डटिंग विखंडन र्टैक डेटिंग जैसी शारीरीक डेटिंग तकनीको का बीडा उठाया है |


        संपत ने भरत लौट के लेट क्रेटोसियस पैलियोजेगोग्राफी के पुननिर्माण से योगदान दिया है | जिसने समकालीन उपवादी वातावरण पर डेक्कान जवालामुखी के प्रभाव का पता लगाया है | वह सन 2010 से 2014 तक इंटरनेशनल यूनियन ऑफ जियोजॉजिकल साइंसेज आययूजीएस के पार्षद थे | वह तीनों प्रमूख भारतीय विज्ञान आकादमियों के एक चुने हुए साथी है | वह भारतीय सांख्यिकि संस्थान कि सलाहकार समिती के सदस्या है |


उपलब्धि : 


पूरस्कार और सम्मान :


1) सन 1974 मे संपत को भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान आकदमी का युवा वैज्ञानिक पदक प्राप्ता हुआ है 

2) सन 1985 मे उन्हे कृष्णन पदक प्रापता हुआ है |

3) सन 1988 मे संपत को भारत सरकारव्दारा शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार से सम्मानित किया गया है |

4) सन 2001 मे उन्हे द वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेस व्दारा एक साथी के रुप मे चुना गया था | 

5) सन 2009 मे उन्हें फ्रांस सरकार ने शेवेलियर उन्सा एल ऑर्ड्रे डेस पाल्म्सा एकेडमिक्सा से सम्मानित कीया गया है |


ग्रंथ/पूस्तक :


1) सन 2007 : दक्षिणी गंगा के मैदानो मे घाटी और अंतर तलछाट कि तलछट भारत संकायों कि खोज और चुंबकीय हस्ताक्षर|

2) 2011 स्वर्गीय चतुघातूक वेइचसेलियन जलोढ इतिहास दक्षीणी कूर्स मैदान, हंगरी मे क्लूवियल लैंडस्के विकास पर नवपाषाणकालीन नियंत्रण

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