नाम : सर जगदीश चंद्र बोस
जन्म तिथी : 30 नवंबर 1853
ठिकाण : मुंशीगंज, बंगाल प्रेसीडेंसी
व्यावसाय : भौतिक विज्ञानी
मृत्यू : 23 नवंबर 1937 आयू 78 वर्षे
पत्नी : अबला बोस
प्रारंभिक जीवनी :
जगदीश चंद्र बोस का जन्म 30 नवंबर 1858 को मुंगसीगंज मे एक बंगाली कायस्थ परीवार मे हुआ था | उनके पिता, भगवान चंद्र बोस ब्रहम समाज के एक प्रमूख सदस्या थे | बोस 1869 मे हरे स्कूल और फिर कोलकता मे सेंट जेवियर्स स्कूल मे शामिल हुए थे | 1875 मे उन्होंने कलकत्ता विश्वाविघ्यालय कि प्रवेश परिक्षा उत्तीर्ण कि थी |
उन्हें सेंट जेवियर्स कॉलेज कलकता मे भर्ती करया गया था | सेंट जेवियर्स मे, बोस जेसूइट फादर यूजीन लाफोंट के संपर्क मे आए जिन्हेांने प्रकृतिक विज्ञानों मे अपनी रुचि विकसित करने मे महत्वापूर्ण भूमिका निभाई थी | उन्होंने कलकत्ता विश्वाविघ्यालय से बीए किया था | उनकी शादी प्रसिध्दा नारीवादी और सामाजिक कार्यकर्ता अबला बोस से हुई थी |
कार्य :
सर जगदीश चंद्र बोस एक बहूरुपिया भौतिक विज्ञानी जिवविज्ञानी सनस्पतीशास्त्री और पूरातत्वाविद थे | ब्रीटिश भारत मे विज्ञान कथा के प्रारंभिक लेखक थै | उन्हेांने रेडियो और माइक्रोबेव ऑप्टिक्सा की जांच का बीडा उठाया था | विज्ञान को रोपेन मे महत्वापूर्ण दिया और उपमहाव्दिप मे प्रयोगीक विज्ञान कि नीव रखी थी | बोस बंगाली विज्ञान कथाओं का जन्म माना जाता है | उन्हेांने पौंधा की वृध्दि को मापने के लिए एक यंत्र क्रैसोग्राफ का भी अविष्कार किया था | उनके सम्मान मे चंद्रमा पर एक गढा नाम दिया गया है |
बोस के अनूवर्ती मइक्रोवेव अनूसंधान का पहला उल्लेखनीय पहलू यह था कि उन्हेांने तरंगो को मिलीमिटर स्तर लगभग 5 मिमि तरंग दैर्ध्य तक घटा दिया था | उनहेांने अपने प्रकाश् जैसी गुणों का अध्यायन करने के लिए लंबी तरंगो के नुकसान का एहसास किया था | बेास का पहला वैज्ञानिक पेपर डबल अपवर्तन क्रिस्टल व्दारा विदयूत किरणों के ध्रूवीकरण पर लॉज के कागज के एक वर्षे के भीतर मई 1895 मे एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल के सूचित किया गयाथा |
अक्टूबर 1895 मे लॉर्ड रेलेव्दारा लंदन के रॉयल सोसाइटी मे उनके दुसरे पेपर का संचार किया गया था | दिसंबर 1895 मे लंदन पत्रिका इलेक्ट्रीशियन वॉल्यूम 36 ने बोस के पेपर ऑन ए न्यू इलेक्ट्रो पोलरिस्कोप को प्रदशित किया था | उस समय लॉज व्दारा गढा गया शब्द कोहेरर का उपयोग अंग्रजी बोलने वाली दुनिया मे हर्ट्रजियन वेब रिसीवर्स या डिटेक्टरों के लिए किया गया जाता था | इलेक्ट्रिशियनने ने बोस के सहकर्मी पर आसानी से टिप्पणी कि थी |
इतिहास मे बोस के स्थान का अब पूनमूल्यांकन किया गयाहै | उनके काम ने रेडियो संचार के विकास मेयोगदान दिया हो सकता है | उनहें मिलीमिटर लंबाई कि विदयूत चुम्बकिय तरंगो कि खोज करने और बायोफिजिक्सा के क्षेत्र मे अग्रणी का क्षेय भी दिया जाता है | उनके कई उपकरण अभी भी पदर्शन पर है और 100 साल बाद अब काफ हद तक उपयोग मे है |
इनमे विविन्ना एंटेना पोलराइजर और वेबगाईड शामिल है , जो आज आधूनिक रुपों मे उपयोग मे बने हुए थे | 1958 मे उनकी जन्म शताबदी मनाने के लिए पश्चिम बंगाल मे जेबीएनटीटीएस छात्रवृत्ति कार्यक्रम शुरुकिया था | उसी वर्षे भारत ने एक डाक टिकट जारी किया था | जिसमे उनका चित्र अंकित था |
14 सितंबर 2012 को मिलीमिटर बैंड रेडियो मे बोस के प्रयोगिक कार्य के इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजिनियरींग मे आईईई मील का पत्थर के रुप मे मान्याता दि गई थी | जो भारत मे पहली ऐसी खोज थी | 30 नवंबर 2016 को बोस को उनके जन्म कि 158 वी वर्षेगांठ पर एक Google उूडल मे मनाया गया था |
बैंक ऑफ इंग्लैंड ने एक प्रख्यात वैज्ञानिक के निर्णय लिया है | भारतीय मुद्रा नोट को फिर से डिजाइन करने का निर्णय लिया है | भारतीय वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बोस को WIFI तकनीक पर अपने अग्रणी काम के लिए उस नामांकन सूची मे चित्रित किया गया है |
पूरस्कार और सम्मान :
1) द ऑर्डर द इडियन एम्पायर सीआयई 1903|
2) द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ इंडिया सीएसआय 1912 का साथी |
3) नाईट बैचलर 1917|
4) रॉयल सोसाइटी के साथी एफआरएस 1920|
5) वियना विज्ञान अकादमी के सदस्या 1928|
पूस्तके :
1) लिविंग एंड नॉन लिविंग मे प्रतिक्रिया 1902|
2) शारीरीक जांच के साधन के रुप मे पौघे कि प्रतिक्रिया 1906|
3) पौधो मे जीवन आंदेालन 1985|