नाम : होमी जहांगीर भाभा
जन्म तिथी : 30 अक्टूबर 1909
ठिकाण : मुंबई
व्यावसाय : परमाणू भौतिक विज्ञानी
मृत्यू : 24 जनवरी 1966 आयू 56 वर्षे
प्रारंभिक जीवनी :
होमी जहांगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 का मुंबई के धनी पारसी परिवार मे हुआ था | जिसके माध्यामे से उनका संबंध व्यावसायी दिनशां मानकेज पेटिट और देारावजी टाटा से था | उनके पिता जहांगीर होरमूसजी भाभा थे | जो पारसी वकिल थे और उनकी मॉ मेहरन थी |
उन्हेांने बॉमबे के केथेड्रल और जॉन कॉनन स्कूल मे अपनी प्रारंभिक पढाई प्राप्त कि थी | 15 वर्षे कि आयू मे एल्फिस्टान कॉलेज मे प्रेवश लिया था | ऑनर्स के साथ आपनी वरिष्ठा कैम्ब्रिज परिक्षा उत्तीर्ण कि थी | इसके बाद उन्हेांने कैम्ब्रिज विश्वाविघ्यालय के कायूस कॉलेज मे प्रवेश लेने से पहले 1927 मे रॉयल इंस्टीटयूट ऑफ साइंस मे भाग लिया |
होमी भाभा कि मौत हो गई थी | जब 24 जनवरी 1966 केा एयर इंडिया कि उडान 101 मौट ब्लांक के पास दुर्घटनाग्रस्ता हो गई थी | जेनेवा हवाई अडउे और पहाड के पास विमान कि स्थिती के बारे मे गलतफहमी दुर्घटना का आधिकारिक कारण है |
कार्य :
होमी जहांगीर भाभा एक भारतीय परमाणू भौतिक विज्ञान संस्थापक, निदेशक है | टाटा इंस्टीटयूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च मे भौतिकी के प्रोफेसर थे | बोलचाल कि भाषा मे भारतीय परमाणू कार्यक्रम के जनक के रुप मे जाना जाता है | भाभा परमाणू ऊर्जा प्रतिष्ठान ट्राम्बे एईईटी के संथापक निदेशक भी थे जिसे अब उनके सम्मान मे भाभा परमाणू अनूसंधान केंद्र का नाम दिया गया है |
टीआयएफआर और एईईटी परमाणू हाथियारों के भारतीय विकास कि आधारशिला थी भाभाने संस्थान मे कॉस्मिक रे रिसर्च यूनिट कि स्थापना कि थी | बिंदू कणो के आदोंलनों के सिध्दांत पर काम करना शुरु किया था | जबकि 1944 मे स्वतंत्र रुप से परमाणू हथियारों पर शोध किया था | 1945 मे उन्हेांने टाटा इंस्टीटयूट कि स्थापना कि थी |
बॉम्बे मे मौलिक अनूसंधान और 1948 मे परमाणू ऊर्जा आयोग अपने पहले अध्याक्ष के रुप मे सेवारत थे | 1943 मे नेहरु ने परमाणू कार्यक्रम के निदेशक के रुप मे भाभा कि नियूक्ति कि थी | अंतराराष्ट्रीय परमाणू ऊर्जा भौतिकी कि प्रगति शामिल थी | यूरेनियम भंडार के बजाय देश के विशाल थोरियम भंडार से बिजली निकालने पर ध्यान कंद्रीय करने कि रणनिति तैयार करने का श्रेय दिया जाता है |
इस रणनितिक उद्रदेश्या को प्राप्त करने के लिए जाना है | इस रणनितिीक प्रस्तावित दृष्टिकोण भारत का तीन चरण का परमाणू ऊर्जा कार्यक्रम बन गया था | एक सक्षम वैज्ञानिक और प्रशासक होने के अलावा भाभा एक शौकिया संगीतज्ञ होने के अलावा एक चित्रकार और शास्त्रीय संगीत और ओपेस के उत्साही भी थे |
उनकेनाम पर अन्या प्रसिध्दा संस्था होमी भाभा नेशनल इंस्टीटयूट है | जो एक भारतीय समझाा जाता है | 1955 मे जिनेवा स्टिजरलैंड मे परमाणू ऊर्जा के शातिपूर्ण उपयोग पर संयूक्त राष्ट्र सम्मेलन के अध्याक्ष के रुप मे कार्य किया था |
पुरस्कार और सम्मान :
1) उन्हे 1958 मे अमरिकन एकेडमी ऑफ आर्टस एंड सइंसेज का विदेशी मानद सदस्या चुना गया था |
2) 1937 मे भाभा को 18951 कि प्रदर्शनी के वरिष्ठा छात्र से सम्मानित किया गया था
3) उनहे 1942 मे एडम्सा पूरस्कार से सम्मानित किया गया था |
4) 1954 मे उनहे पदमभूषण से सम्मानित किया गया था |
5) वह रॉयल सोयसायटी के साथी थे |
पूस्तके :
1) द पैसेज ऑफ फास्टा इलेक्ट्रॉन्सा एंड दथ्योरी ऑफ कॉस्मिक शॉवर्स|