नाम : इरावती कर्वे
जन्म तिथी : 15 दिसंबर 1905
ठिकाण : बर्मा
व्यावसाय : मानवविज्ञानी
पति : दिनकर घोंडो करवे
मृत्यू : 11 अगस्ता 1970
प्रारंभिक जीवनी :
इरावती कर्वे का जन्म 15 दिसंबर 1905 को एक धनी चतिपावन ब्राम्हाण परिवार मे बर्मा मे हुआ था | उनक नाम बर्मा मे इरावदी नदी के नाम पर रखा गया था | जहां उनके पिता गणेश हरि कर्मकार, बर्मा कॉटन कंपनी के लिए काम कर रहे थे | उन्होंने सात साल कि उम्र से पूणे के गर्ल्स बोर्डिंग स्कूल हुजूरपागा मे भाग लिया था |
और फिर फर्ग्यूसन कॉलेज मे दर्शनशास्त्र कि पढाई कि थी | जिसमें से उन्होंने 1926 मे स्त्रातक कि उपाधि प्राप्त कि थी | उन्होंने बॉम्बे यूनिवर्सिटी मे जीएस घोरी से समाजशास्त्रकि पढाई करने के लिए दक्षिणा फैलोशिप प्राप्ता कि थी | इरावती ने दिनकर धोंडो करवे से शादी कि थी | जिन्हेांने एक स्कूल मे रसायन शास्त्र पढाया था |
हालांकि उनके पति एक सामाजिक रुप से प्रतिष्ठित ब्रम्हाण परिवार से थे लेकिन मैच उनके पिता से अनूमोदन के साथ नही जिन्होंने उम्मीद कि थी | वह एक रियासत के शासक परिवार से शादी करेंगे दिनकर घोडो केशव कर्वे के पूत्र थे, जो महिला शिक्षा के अग्रदूत थे |
कार्य :
इरावती कर्वे, महाराष्ट्र भारत के मारवविज्ञानी, समाज शास्त्री शिक्षाविदू और लेखक थे | कर्वे ने 1931 से 1936 तक बॉम्बे मे एसएनडीटी महिला विश्वाविघ्यालय मे एक प्रशासक के रुप मे काम किया था | वह 1939 मे समाजशास्त्र मे एक रीडर के रुप मे पूणे के डेक्कान कॉलेज चली गई थी | कर्वे पहली भारतीय महिला मानवविज्ञानी थी |
एक अनूशासन जो उनके जीवनकाल मे भारत मे आमतौर पर सामाजशास्त्र का पर्याय था | उसके पास नृविज्ञान, इंडोलॉजी और पूरापाषाण के साथ साथ लोक गीतों को एकत्र करने और नारी वादी कविता का अनूवाद करने सहित व्यापक शैक्षणिक रुचियाँ थी | वह मूलत: एक प्रसारवादी थी |
उन्हेांने उस समय नृवज्ञान विभाग कि स्थापना कि थी | जो जब पुजा विश्वाविघ्यालय था | कर्वे ने कई वर्षोतक पूणे के डेकान कॉलेज मे समाजशास्त्र और नृविज्ञान विभाग के प्रमूख के रुप मे कार्य किया था | उन्होंने 1994 मे नई दिल्ली मे आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस के नृविज्ञान विभाग कि अध्याक्षता कि थी | उन्होंने मराठी और अंग्रेजी दोनो भाषाओं मे लिखा था |
उसकी पडने कि सीमा विस्तृत थी , भक्ति कवियों रामलीला, रामऑस्टिन, जेन ऑस्टेन, अर्ल्ब्ट कैमस और एलिस्टेयर मैकलेन जैसे रामायण जैसे संस्कूत महाकाव्यों को शामिल करते हूए थे | अकादमिक विषयों से सबंधित पूस्तकों के पूस्ताकालय अब डेकन कॉलेज के संग्रह का एक हिस्सा है |
पूस्तके :
1) भारत मे रश्तिेदारी संगठन 1953|
2) हिंदू समाज एक व्याख्या 1961|
3) महाराष्ट्र भूमि और लोग 1968|
4) युगांत द एंड ऑफ ए एपोच महाभारत|
पूरस्कार और सम्मान :
1) उनहे 1967 मे साहीत्या अकादमी पूरस्कार जीता था |