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जमुना शरण सिंह की जीवनी - Biography of Jamuna Sharan Singh in hindi jivani

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नाम : जमुना शरण सिंह

जन्म तिथी : 26 दिसंबर 1941

ठिकाण : इलाहाबाद, उत्तरप्रदेश

व्यावसाय : परिस्थितिकविदू

पति : शरण सिंह


प्रांरभिक जीवनी :


        जमुना शरण सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1941 को उततरप्रेदश के इलाहाबाद मे हुआ था | उनके माता पिता विश्वाम्भार और चंद्रकली देवी थे | जमुना ने 1957 मे इलाहाबाद विशविघ्यालय से विज्ञान मे स्त्रातक कि उपाधि प्राप्ता कि थी | उसी संस्थान मे अपनी मास्टार डिग्री पूरी करने के लिए पढाई जारी रखी थी |


        बाद मे उन्होंने 1967 मे बनारस हिंदू विश्वाविघ्यालय से अपनी थीसीस घास के मैदान कि गतिशिलता के लिए डॉक्टरेट कि उपाधि पीएचडी प्रापता कि थी जो प्रख्यात परिस्थितिकिविदों रामदेव और कैलाश सी मिश्रा के मार्गदर्शन मे किया गया था | सिंह कि शादी त्रिपूरा मे हुई है | दंपाति के दो बेटे और दो बेटियां है | उनका परिवार बाराणसी मे रहता है |


कार्य :


        जमुना सिंह एक भारतीय परिस्थितिविदू है | वह अकादमिक और बनारास हिंदू विश्वाविघ्यालय मे वनस्पती विज्ञान और परिस्थितिक विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर है | उन्हें चरागाह परिस्थितिकी प्रणालियों पर उनके अध्यायन के लिए जाना जाता है | जिन्हें उष्णकटिबंधिय घास के मैदानों के बेहतर प्रबंध्ंन मे सहायता करने कि सूचना है |


        उन्होंने 1968 मे कुरुक्षेत्र विश्वाविघ्यालय मे एक व्याख्यात के रुप मे शामिल होकर अपने करियर कि शूरुआत कि थी | उन्हेांने कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के प्राकृतिक संसाधन परिस्थितिकी प्रयोगशाला मे एक विजिटिंग वैज्ञानिक के रुप मे काम करने के लिए ब्रेक लिया था |


        1947 मे अमेरिका से लौटने के बाद, सिंह ने कुरुक्षेत्र विशवविघ्यालय मे अपनी सेवा फीर से शुरु कि थी |लेकिन एक साल के बाद स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली मे लैंडस्कोप अर्किटेक्चर विभाग मे एक पाठक के रुप मे चले गए थे | उन्हेांने 1991 से 1993 तक विभागाध्याक्ष के रुप मे कार्य किया |


        1997 से बॉटनी मे सेंटर ऑफ एडवांस स्टडी के समन्वयक के रुप मे अपने पद से 2003 तक सेवा मे रहे है | अपनी सेवानिवृत्ती के बाद उन्हेांने विश्वाविघ्यालय मे एक एमिरेटस प्रोफेसर के रुप मे अपना सहयोग जारी रखा था | वे ट्रॉपिकल के लिए इंटरनेशनल सोसाइटी के पूर्व सचिव है | इकोलॉजी और अपनी पत्रिका ट्रॉपिकल इकोलॉजी के मुख्या संपादक के पद पर रहे है | वे अपने शोध मे 43 डॉक्टरेट विव्दानों का मार्गदर्शन कर चुके है |


पूरस्कार और सम्मान :


1) सिहं को 1980 को सर्वोच्चा भारतीय विज्ञान पूरस्कारों मे से एक शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार से सम्मानित किया गया था |

2) उनहें 1995 मे प्रणवानंद सरस्वाती पूरस्कार के लिए चुना गया था |

3) इंडियन बोटैनिकल सोसाइटी ने उन्हें 1999 मे बीरबल साहनी स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था |

4) उन्हें भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के प्रोफेसर एस बी सक्सेना मेमोरियल पदक से सम्मानित किया गया था |

5) 2003 मे उन्होंने पर्यावरण और सतत विकास के संरक्षण के लिए सोसायटी का गौरव प्राप्ता किया था |

6) 2005 मे उनहें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रापता किया |

7) 2009 मे बायोडायवर्सिटी लेक्चर अवार्ड सहित कई पुरस्कार प्रदान किए है |


पूस्तके :


1) पाद परिस्थितिकी मे अनूसंधान विधियाँ 1986|

2) घासभूमि वनस्पति इसकी संरचना कार्य उपयोग और प्रबंधन 1977|

3) पहाडो मे विज्ञान और ग्रामीण विकास परिस्थितिक, समाजिक आर्थीक और तकनीकि पहलू 1981|

4) उष्णकटिबंधीय परिस्थितिक तंत्र परिस्थितिकि और प्रबंधन 1992|

5) हिमालय के वन संरचना कार्य मनुष्या का प्रभाव 1992|

6) शुष्क उष्ण्ंकटिबंधीय वन मिट्रटी मे मेथनोटोप्सा के विपरित पैटर्न मिर्टी के नाइट्रोजन कार्बन और नमी का प्रभाव 2007|

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