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जानमी अम्मल इडवलाथ कक्कट की जीवनी - Biography of Janami Ammal Idavalath Kakkat in hindi jivani

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नाम : जानमी अम्मल इडवलाथ कक्कट

जन्म तिथी : 4 नवबंर 1897

ठिकाण : टेलिचेरी, मद्रास प्रेसीडेंसी

व्यावसाय : वनस्पतिशास्त्री

पती : श्रिनिवास रामनूजन

मृत्यू : 7 फरवरी 1984 आयू 86 वर्षे 


प्रारंभिक जीवनी :


        जानकी अम्मल का जन्म 4 नवंबर 1897 को दिवान बहादूर इडवलथ कक्कट कृष्णन और देवी कुरुवयके टलिचेरी मे थिया परिवार मे हुआ था | उसकी मॉ जॉन चाइल्ड हैनिन गटन त्रावणकोर और कुन्ही कुरबई के निवासी कि एक नाजायज बेटी थी | जो बाद मे वाल्टर गावेन किंग कि मालकिन थी | जानकी अम्मल ने थैलासरी के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट मे अध्यायन किया था |


        उसके बाद व्कीन मैरी कॉलज ऑफ मद्रास मे उन्हेांने प्रोसीडेसी कॉलेज से सनस्पति विज्ञान मे ऑनर्स कि डिग्री प्रापता कि थी | 1924 मे उन्हेांने मिशिगन विश्वाविघ्यालय चले गए थे | 1926 मे बारबोर स्कॉलरशिप के साथ वनस्पति विज्ञान मे स्त्रातकोत्तार कि डिग्री प्राप्ता कि थी |


कार्य :


        जानकी अम्मल एक भारतीय वनस्पतिशास्त्री थे | जिन्हेांने पादप प्रजनन, साइटोजेनेटिक्सा और फाइटोगियोग्राफी पर काम किया था | उनके सबसे उल्लेखनीय काम मे गन्ने और बैंगन पर अध्यायन शामिल था | लेकिन उन्होंने पौधो कि एक श्रृंखला के साइटोजेनिटिक्सा पर भी काम किया था | जानकी अम्मल ने तब जॉन इन्सा इास्टीटयूट मर्टन , लंदन मे दाखिला लिया था |


        जहां उन्हेांने सी डी डार्जिगटन के साथ काम किया जो एक दीर्घकालिक सहयोगी बनेंगे 1932 से 1934 तक उन्हेांने केरल के त्रिवेंद्रम मे महाराजा कॉलेज ऑफ साइंस मे वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर के रुप मे कार्य किया था | उसके बाद उन्होंने कायेबटूर मे गन्ना प्रजनन संस्थान मे वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर के रुप मे काम किया था | उसक काम संकर 63: 32 कि विविधता सहीत कई अंतर्जात फ्रॉस सहित संकर के उत्पादन मे शामिल किया था | उसके बाद उन्होंने अगल छह साल के उत्पादन मे शामिल था | 1945 मे एक संबंधित पौघो का क्रोमोसोम एटल प्रकाशित किया है |


        उन्हें 1945 से 1951 तक रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसायटी, वेस्ले मे एक साइकोलॉजिस्टा के रुप मे काम करने के लिए आमंत्रित किया गया था | उसने केंद्रीय वनस्पती प्रयोग शाला के निदेशक के रुप मे काम किया था | वह नृवंशविज्ञान मे विशेष रुचि लेती थी | अनूसंधान प्रयोगशाला मे विशेष कर्तव्या पर एक अधिकारी के रुप मे कार्य किया था |


        इंग्लंड मे बिताए गए वर्षेा 1939: 1950 के दौरान, उन्हेांने उघान पौघों कि एक विस्तृत श्रृंखला के गुणसूत्रों का अध्यायन किया था | गुणसूत्र संख्याओं और कई मामलों मे स्पष्टता पर उनके अध्यायन ने प्रजातियों और किस्मों के विकास पर प्रकाश डाला था | गुणात्मक पौघज्ञे का गुणसूत्र एटलस एक संकलन था , जिसने कई प्रजातियों पर अपने स्वयं के काम को शामिल किया था | अम्मल ने जनाना, सोलनम घतूरा मेंथा सिंबोपोगोन और डायोस्कोरिया के अलावा औषधीय और अन्या पौधो पर भी काम किया था | उसने अपने शोध के मूल निष्कर्षो को प्रकाशित करना जारी रखा था |


        1950 के दशक कि शुरुआत मे रॅयल हॉर्टिकल्चर सोसायटी के गार्डन बिस्ली के लिए काम कर रहे है | एक आनुवंशिकिविदू के रुप मे डॉ जानकी सहित कई लफडी के पौधो पर कोलचिकिन के प्रभाव कि जांच कर थे |

2018 मे उनके उल्लेखनीय कैरियर और पोधे विज्ञान मे योगदान के लिए दो भारतीय पादप प्रजनकों गिरीजा और वीरु वीराराधवन ने एक नई गुलाब किस्म का निर्माण किया था | जिसे उन्हेांने ईके जानकी अम्मल नाम लिया था |


पूरस्कार और सम्मान :


1) अम्मल को 1935 मे इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज का फेलो चुना गया था 

2) मिशिगन यूनिवर्सिटी ने मानद एलएल उी से सम्मानित किया गया था 

3) भारत सरकार ने उनहे 1977 मे पदमश्री से सम्मानित कीया गया था 

4) भारत सरकार के पर्याकवरणऔर वानिकि मंत्रालय ने उनके नाम पर 2000 मे टैक्सोनॉमी के रार्ष्टीय पूरस्कार कि स्थापना कि थी |

5) 1999 मे उन्हें जानकी अम्मल नेशनल अवार्ड ऑन प्लांट टैक्सोनॉमी और जानकी अम्मल अनेशनल अवार्ड ऑन एनिमल टैक्सोनॉमी कि स्थापना कि थी |

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