नाम : जनार्दन गणपराव नेगी
जन्म तिथी : 1 अगस्ता 1936
ठिकाण : खिडगांव खंडवा जिला मध्याप्रदेश
व्यावसाय : भूभौतिकीविद
पत्नी : आशा बिलोर
मृत्यू : 9 नवबंर 2016 आयू 80 वर्षै
प्रारंभिक जीवनी :
जनार्दन नेगी का जन्म 1 अगस्ता 1936 केा मध्याप्रेदश के खंडवा जिले के खिंडगांव मे हुआ था जनार्दन ने विक्टोरिया कॉलज वर्तमान एमएलबी गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ एक्सलेंस से विज्ञानमे स्त्रातक कि पढाई पूरी कि थी | 1956 मे दान सिंह बिष्ट गवर्नमेंट कॉलेज नैनीताल से 1958 मे मास्टार डिग्री प्राप्ता कि थी | इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी खडगपूर मे डॉक्टरेट कि पढाई के लिए और 1962 मे पीएचडी कि उपाधि प्रातपा कि थी | नेगी की शादी आशा बिलोर से हुई थी के दो बेटे है | अतुल और माधव उनके नाम है |
कार्य :
जनार्दन नेगी एक भारतीय सेघ्दांतिक भूभौतिकीविदू और राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनूसंधान संस्थान मे एक उभरते वेज्ञानिक है | वह जियोइलेक्ट्रोमैग्नेटिक्सा और जियोमैग्नेटिजम पर अपने अध्यायन के लिए जाना जाता है | वे एक शोध विज्ञान के रुप मे दो और वर्षो तक आयआयटी खडगपूर मे रहेथे |
और 1964 मे रार्ष्टीय भूभौतिकीय अनूसंधान संस्थान, हैदराबाद मे एक वरिष्ठा वैज्ञानिक अधिकारी के रुप मे शामिल हुए थे | उन्हेांने एनजीआरआई मे अपने अधिकारिक करियर के बाकी समय सहायक निदेशक 1971 से 79 तक वरीष्ठा सहायक निदेशक 1979: 82 उपनिदेशक 1982: 83 जैस विभिन्ना पदों मे सेवारत किए थे |
नेगी के सैध्दांतिक अध्यायन भू भौतिकी और भूभौतिकी के भूचुंबकत्वा के क्षेत्रो पर ध्यान केंद्रीत कर रहे है | और उनके शोधों ने पृथ्वी कि सतह के गुरुत्वाकर्षण गर्मी के प्रवाह और विदयूत चुंम्बकिय क्षेत्रो कि व्यापक समझा मे सहायता कि है | उनके काम को कई लेखकों ने उदधृत कियाहै | 1992: 1994 और 2005: 06 के दौरान दो कार्यकालों के लिए मध्याप्रदेश सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार के रुप मे कार्य किया था |
जब सन 2003 मे इंस्टीटयूट ऑफ सिस्मोलॉजिकल रिसर्च गांधीनगर कि स्थापना कि गई थी | उन्हेंने 2005 तक के संस्थापक महानिदेशक के रुप मे कार्य किया था | यूनेस्को के पूर्व व्याख्याता और पार्यावरण विज्ञान मे अनूसंधान के लिए सहकारी संस्थान सहित कई विश्वाविघ्यालयों मे विजिटिंग फैकल्टी है |
पूरस्कार और सम्मन :
1) नेगी ने 1974 मे भारतीय भूभौतिकीय संघ का कृष्णान पदक प्रापता किया था |
2) वैज्ञानिक और औघोगिक अनूसंधान परिषद ने उनहें 1980 मे सर्वोच्चा भारतीय विज्ञान पूरस्कार मे से एक शांति स्वरुप भटनागर पूरस्कार से सम्मानित किया गया था |
3) रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ने उन्हे 1984 मे नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज भारत व्दारा ए क साथी के रुप चुना गया था |
4) उन्हें 1991 मे एसोसिएशन ऑफ एक्सप्लोरेशन ऑफ जियोफिजिसिस्टा अवार्ड से सम्मानित
5) 1991 ई जी लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित
6) होल्कर साइंस कॉलेज शताब्दी पूरस्कार से सम्मानित
7) उनहें विज्ञान रत्न पूरस्कार से सम्मानित किया गया था |
पूस्तके :
1) जियोइलेक्ट्रोग्रेटिजन मे अनिसोट्रॉपी 1989|