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सुब्बया शिवशंकरनारायण पिल्लाई की जीवनी - Biography of Subbayya Shivshankar Narayan Pillai in hindi jivani

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नाम : सुब्बया शिवशंकरनारायण पिल्लाई

जन्म दि: 5 अप्रैल 1901

ठिकाण : नागरकोइल

माता : गोमती अम्मल

व्यावसाय : संख्याओ के रुप मे संख्याओ का प्रतिनिधित्वा करने के संबंध


प्रांरभिक जीवन :


        सुब्बया शिवशंकरनारायण पिल्लाई का जन्म 5 अप्रेल् 1901 को हुवा था | उनका जन्म नागरकोइल मे हुवा था | पिता का नाम सुखय पिल्लई था | और माता का नाम गोमती अम्मल था | उनके जन्म के बाद मे उनके मॉ का मूत्यृ हो गया था | और उनके पिता पिल्लै स्कूल मे अपने अंतिम वर्ष मे थे प्राथमिक विघालय के शिक्षण शास्त्री ने अपने माता पिता के निधन के बाद उनका स्कूली शिक्षा का ध्या रखा था और कुछ शुभचिंतको ने उनके कॉलेज के खर्चो को वित्ता पोषित किया था | पिल्लाई के लिए असली रास्ता तब आया जब उन्हें गणित मे एमए के लिए मद्रास विश्वाविदयालय मे प्रवेश से बंचित कर दिया गया था |


        विश्वाविदयालय ने केवल उन्ही को प्रवेश दिया उन्होंने स्त्रातक स्तार पर प्रथम श्रेणी हासिल कि थी | सीनेट ने 1927 मे पिल्लाई के पक्ष मे मतदान किया था | पिललाई ने मास्टार डिग्री पूरी कि थी | उसके बाद 1929 मे एक गणित व्याख्याता के रुप मे अन्नामलाई विश्वाविदयालय मे शामिल हुए थे | जहॉ उन्होने बारा वर्षे तक काम किया था |


        उन्होंने अभुतपूर्व कागजात का निर्माण किया था | उनके शोध को बाद मे मद्रास विश्वाविदयालय व्दारा मान्याता दि गई थी | पिल्लाई को डिएससी डॉकटर ऑफ साइंस से सम्मानित किया गया था | विशेष रुप से नंबर सिध्दांत कारों व्दारा वारिग की समस्या को हाल करने के लिए 1770 मे अंग्रजी गणितज्ञ एववर्ड वारिंग व्दाारा प्रस्तावित किया गया था | और 18 वी 19 वी ओर 20 वी शताब्दी के उत्तरार्ध के पशेवर गणितज्ञो के लिए एक बडी चुनौती माना जाता था |


कार्य :


        पिल्लाई को अगस्ता 1950 मे अल्बर्ट आइंस्टीन और अन्या प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के साथ एक वर्ष के लिए काम करने के लिए आमंत्रित किया गया था | लेकिन इस कार्यभार को लेने से पहले उनहें अगस्ता सितंबर 1950 मे हार्वड विश्वाविदयालय मे आंतर्राष्ट्रीय गणितज्ञों के लिए एक वक्ता के रुप मे आमंत्रित किया गया था |


        जिनहें आर बाला सुब्रमण्याम औरआर थंगापुरई की पुसताक शिवशंकरनारायण पिल्लाई की की सामुहित कृतियों मे संकलित किया गया था | उन्हें मद्रास विश्वाविदयालय के प्रतिनिधि के रुप मे हार्वडे विश्वाविदयालय मे गणितज्ञों के अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस मे भाग लेने के लिए आमंत्रित किया था |


उपलब्धी :


1) उीएससी डॉक्टर ऑफ साइंस से सम्मानित किया गया था |

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