नाम : जॉन बर्डन सैंडरसन हल्हाने
जन्म तिथी : 5 नवंबर 1964 आयू 72 वर्षे
ठिकाण : ऑक्साफोर्ड, इंग्लैंड
व्यावसाय : ब्रिटीश भारतीय वैज्ञानिक
मृत्यू : 1 दिसंबर 1964
पत्नी : शार्लेट फ्रेंकेन
प्रांरभिक जीवनी :
जॉन हल्दाने का जन्म 5 नवंबर 1964 को इंग्लैंड के ऑक्साफोर्ड मे हुआ था | उनकी बेटी बहन नाओमी मिचीसन एक लेखक बन गई थी | उनके चाचा विस्काउंट हल्दाने और उनकी चाची लेखक एजिलाबेथ हल्दाने थे | क्लान हल्दाने के एक कुलीन और धर्मनिरपेक्ष परिवार से उतरे उन्होंने बाद मे दावा किया कि उनके वाई गुणसूत्र का पता रॉबर्ट ब्रूस से किया जा सकता है|
वह 11 क्रिक रोड, उत्तरी ऑक्साफोर्ड मे बडा हुआ था | उन्होंने तीन साल कि उम्र मे पढाना सीखा था | चार साल कि उम्र मे अपने माथे पर चोट लगने के बाद उन्होंने डॉक्टर से पूछा क्या यह ॲक्साहैमोग्लोबिन या कार्बोक्सी हैमोग्लोबिन है | उन्होंने 1976 मे शार्लेट फ्रेंकेन से शादी कर ली थी |
कार्य :
जे बीएस हल्दाने एक ब्रिटीश भारतीय वैज्ञानिक थे | जिन्हे शरीर विज्ञान, अनुवांशिकी विकासवादी जीव विज्ञान के अध्यायन मे उनके काम के लिए जाना जाता है | उन्होंने सांख्यिकि और जैव प्रौघोगिक के क्षैत्र मे अभिनव योगदान दिया था | 1929 मे एबोजेनेसिस पर उनके लेख मे प्राइमर्डियल खूप सिध्दांत को पेश किया था |
यह जीवन कि रासायनिक उत्पाति के लिए भौतिक मॉडल बनाने कि जीव बन गया था | प्रजातियों मे सकर के विशेष लिंग मे बाँझापन पर कोडित हेल्देन के नियम को कोडित किया था | क्येाकी वह मृत्यू मे भी उपयोगी बने रहता चाहते थै उन्हे मानव जीवविज्ञान मे क्लोन और क्लोनिंग शब्दों को गठने के लिए भी याद किया जाता है |
उन्होंने 15 अगस्ता 1914 को ब्लैक वॉच रॉयल हाइलैंड रेजिमेट कि तिसरी बटालियन मे एक अस्थायी व्दितीय लेक्टिमेंट के रुप मे ब्रिटीश सेना मे लडाई लढी थी उनहें अस्थायी रुप से पदोन्नत किया गया था | 1922 के बीच वह न्यू कॉलेज, ऑक्सफोर्ड के फेलो थे | जहां उन्होंने फिजियोलॉजी कैम्ब्रिज विश्वाविघ्यालय चले गए, जहां उन्हेांने बायोकेमिस्ट्री मे रीडरशीप स्वीकार कि और 1932 तक पढाया था | वह जॉन इनेस हॉटिकल्चर इंस्टीटयूशन मे जेनेटिकल रिसर्च के हेड भी रहे है |
कैम्ब्रिज मे अपने नौ वर्षो के दौरान हेल्देन ने एजाइम और आनूवंशिकी पर काम किया था | वह 1930 से 1932 तक रॉयल इंस्टीटयूशन मे फिजियोलॉजी के फुलरियन प्रोफेसर थे | 1933 मे वे यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन मे जेनिटिक्सा के पूर्ण प्रोफेसर बन गए थे | अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए, हेल्दाने का पहला प्रकाशन हीमोग्लोबिन व्दारा गैसीज विनियम के तंत्र पर था | और बाद मे पीएच बफर के रुप मे रक्त के रासायनिक गुणों पर काम किया था | उन्हेांने गुर्दे के कार्यो और उत्सर्जन के तत्र के कई पहलूओं कि जांच कि थी |
पूरस्कार और सम्मान :
1) 1932 मे हल्देन केा रॉयल सोसायटी का फेलो चुना गया था |
2) फांसीसी सरकार ने उन्हें 1937 मे नेशनल ऑर्डर ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया था |
3) 1952 मे उन्हेांने रॉयल सोसायटी से डार्विन पदक प्राप्ता किया था |
4) 1956 मे उन्हे ग्रेट ब्रिटेन के मानव विज्ञान संस्थान के हक्सले मेमोरियल पदक से सम्मानित किया गया था |
5) उन्हेांने 1961 मे एकेडेमिया नाजियोनेल देई लिन्सी फेल्ट्रिनाली पूरस्कार प्राप्ता किया गया था |
6) उन्हे न्यू कॉलेज मे मानद डॉक्टरेट ऑफ साइंस मानद फैलोशिप और यूएसए नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज का किम्बर पूरस्कार भी मिला था |
पूस्तके :
1) एनिमल बायोलॉजी 1929|
2) एंजाइम 1930|
3) मनूष्या कि असमानता और अन्या निबंध 1932|
4) विज्ञान और मानव जीवन 1933|
5) मानव विज्ञान और राजनिति 1934|
6) फैक्ट एंड फेथ 1934|