नाम : संध्या कौशिका
जन्म
ठिकाण : भारत
व्यावसाय : न्यूरोसाइंटिस्टा
प्रारंभिक जीवनी :
संध्या कौशिका एक भारतीय न्यूरोसाइंटिस्टा है | वर्तमान मे वह टाटा इंस्टीटयूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई मे कार्यरत है | उनकी रुची का मूख्या क्षेत्र तांतित्रका कोशीकाओं के भीतर अक्षीय परिवहन का नियनयमन है |
संध्या कोशिका ने गुजरात के बडौदा महाराज सयाजीराव विश्वाविघ्यालय से बीएससी और एमएससी कि उपाधि प्राप्ता कि है | उन्होंने ब्रााडीस विश्वाविघ्यालय से सेललुर और आणविक जीवविज्ञान मे अपनी पीएचडी कि उपाधि पूरी कि है | उन्हेांने अपने पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च वाशिंगटन विश्वाविघ्यालय से प्राप्ता किया है |
कार्य :
संध्या ने नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज बैंगलोर मे एक संकाय के रुप मे कार्य किया है | संध्या तांत्रिका कोशिकाओ के भीतर यातयात का अध्यायन करती है |जिसे एक्सेानल र्टाासपोर्ट का जाता है | इस प्रक्रिया का अध्यायन करना चुनौतीपूर्ण्ं है | आंशिक रुप से क्योंकि एनेस्थे टाइजिंग मॉडल जीव भी अक्षीय परिवहन को निलंबित करताहै |
इसलिए इसे प्रकट करना आसान नही है | संध्या और उसका समूह सहयोग से राउंडवॉर्म मे परिवहन का अध्यायन करने के लिए एक माइक्रोक्लूइडिक दृष्टिकोण स्थापित करणे कार्य करता है | इसक दुष्टीकोण के माध्याम से जीवित कृमि का अध्यायन चिप मे किया जाता है | और एक्सेनल परिवहन का अध्यायन भी किया गया जाता है |
इस दृष्टिकोण के बाद उसका समूह एक्सोनल ट्राासपोर्ट के विभिन्ना चरणों मे से प्रत्येक के विनियमन को उजागर शूरुकर रहा है , जैसे कि मोटर प्रोटीन का भाग्या जो कार्गो को ले जाता है | इसक प्रक्रिया मे नियंत्रण का नूकसान न्यूरोडिजेरेटिव बीमारीयों एमियोट्राफफिक लेटरल स्क्लेरोसिस एएलएस और चारकोट मैरी टॅथ 2 ए मे देख गया है | जो एक विरासत मे मिली स्थिति है | जो पैरों मे तांत्रिका आवेगो के संरचण को पीछे छोडती है |
उपलब्धि :
पुरस्कार और सम्मान :
1) संध्या कौशिका को हॉवर्ड हयूजेस मेडिकल इंस्टीटयूट यूएसए व्दारा अंतरराष्ट्रीय प्रारंभिक कैरियर पूरस्कार प्राप्त हुआ है |
पूस्तक और ग्रंथ :
1) 2013 मे प्रकाशित :संध्या कौशिका नए मॉडल और समूदायों का निर्माण|
2) 4: 11: 2010: द केनोरॉर्बडाईटिस किसीन 3 मोटर यूएनसी 104/KIFIA कार्गो के लिए विशिष्टा बंधन के नूकसान पर आधारित है |